अनुच्छेद 12 के अनुसार, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, "राज्य" के अंतर्गत निम्नलिखित शामिल हैं:
भारत सरकार और संसद (Government and Parliament of India): इसका अर्थ है केंद्र की कार्यपालिका (Executive) और विधायिका (Legislature)।
प्रत्येक राज्य की सरकार और विधानमंडल (Government and Legislature of each State): इसका अर्थ है राज्यों की कार्यपालिका और विधायिका।
भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर या भारत सरकार के नियंत्रण के अधीन सभी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी (All local or other authorities within the territory of India or under the control of the Government of India):
"अन्य प्राधिकारी" शब्द की व्याख्या सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर विभिन्न मामलों में की है। यहां कुछ महत्वपूर्ण केस लॉ दिए गए हैं:
राजस्थान राज्य विद्युत बोर्ड बनाम मोहन लाल (Rajasthan State Electricity Board vs. Mohan Lal), 1967: इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि "अन्य प्राधिकारी" शब्द में वे सभी निकाय शामिल हैं जिन्हें कानून द्वारा शक्तियां (powers) दी गई हैं, भले ही वे वाणिज्यिक (commercial) कार्य कर रहे हों।
सुखदेव सिंह बनाम भगतराम (Sukhdev Singh vs. Bhagatram), 1975: इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि LIC, ONGC और IFC जैसी सांविधिक निगम (statutory corporations) "राज्य" हैं क्योंकि वे महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य (public functions) करते हैं।
रमणा दयाराम शेट्टी बनाम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (Ramana Dayaram Shetty vs. International Airport Authority), 1979: इस मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्धारित करने के लिए मानदंड (criteria) निर्धारित किए कि क्या कोई निकाय "राज्य" का साधन (instrumentality) है।
अजय हसिया बनाम खालिद मुजीब (Ajay Hasia vs. Khalid Mujib), 1981: सुप्रीम कोर्ट ने माना कि एक सोसायटी (society), जो एक कॉलेज का संचालन करती थी और सरकार द्वारा नियंत्रित थी, "राज्य" थी।
प्रदीप कुमार बिस्वास बनाम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल बायोलॉजी (Pradeep Kumar Biswas v. Indian Institute of Chemical Biology), 2002: सुप्रीम कोर्ट ने माना की CSIR, जो की एक सोसाइटी है, सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत, आर्टिकल 12 के तहत 'अन्य अथॉरिटी' है.
ज़ी टेलीफिल्म्स बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (Zee Telefilms vs. Union of India), 2005: इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि BCCI "राज्य" नहीं है क्योंकि यह सरकार द्वारा वित्तपोषित (funded) या नियंत्रित (controlled) नहीं है।
रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा (Rupa Ashok Hurra v. Ashok Hurra), 2002: सुप्रीम कोर्ट ने ये माना की न्यायिक प्रक्रिया (judicial proceedings) को कभी भी मौलिक अधिकारो (fundamental rights) का उलंघन करने वाला नहीं कहा जा सकता, और उच्चतर न्यायालय अनुच्छेद 12 के अधीन राज्य या अन्य प्राधिकारियों के दायरे में नहीं आती हैं।
यह एक जटिल प्रश्न है। अनुच्छेद 12 न्यायपालिका को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं करता है।
न्यायिक कार्य (Judicial Functions): जब न्यायालय न्यायिक कार्य (जैसे मुकदमों का फैसला करना) करते हैं, तो आमतौर पर उन्हें "राज्य" नहीं माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं और संविधान की रक्षा करते हैं।
प्रशासनिक कार्य (Administrative Functions): जब न्यायालय प्रशासनिक कार्य (जैसे नियम बनाना, कर्मचारियों की नियुक्ति करना) करते हैं, तो उन्हें "राज्य" माना जा सकता है।
प्रेम गर्ग बनाम एक्साइज कमिश्नर एच.पी. (Prem Garg v. Excise Commissioner H.P.): सुप्रीम कोर्ट ने माना की जब न्यायपालिका की रूल-मेकिंग (rule making) शक्ति का सवाल उठता है तो वो 'राज्य' है।
इसलिए, न्यायपालिका को "राज्य" माना जाएगा या नहीं, यह उसके द्वारा किए जा रहे कार्य की प्रकृति (nature) पर निर्भर करता है।
अनुच्छेद 12 का महत्व निम्नलिखित है:
मौलिक अधिकारों की सुरक्षा (Protection of Fundamental Rights): यह सुनिश्चित करता है कि मौलिक अधिकार केवल सरकार के खिलाफ ही नहीं, बल्कि उन सभी निकायों के खिलाफ भी लागू हों जो सरकार के कार्यों को करते हैं या सरकार द्वारा नियंत्रित होते हैं।
जवाबदेही (Accountability): यह "राज्य" की परिभाषा के अंतर्गत आने वाले सभी निकायों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह बनाता है।
कानून का शासन (Rule of Law): यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी संस्था या व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
सुशासन (Good Governance): यह सुनिश्चित करता है की सभी पब्लिक अथॉरिटीज (public authorities) संविधान के नियमो और नैतिक आचरण का पालन करे.
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